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MOTILAL NEHRU LAW COLLEGE

Affiliated To :- Krantisurya Tantya Bhil Vishwavidyalay, Khargone
Approved By :- Bar Council of India, New Delhi
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घृणा अपराध में लिंग का प्रभाव

घृणा अपराध में लिंग का प्रभाव एक जटिल और महत्वपूर्ण विषय है। यह समझना आवश्यक है कि लिंग, घृणा अपराधों में पीड़ित और अपराधी दोनों की पहचान और अनुभव को कैसे प्रभावित करता है। यहाँ कुछ प्रमुख बिंदु दिए गए हैं जो घृणा अपराधों में लिंग के प्रभाव को समझाते हैं: 1. शिकार/पीड़ित के रूप में लिंग का प्रभाव घृणा अपराधों में लिंग एक प्राथमिक प्रेरक कारक हो सकता है। लैंगिक पहचान के आधार पर हमले LGBTQ समुदाय के व्यक्ति, विशेष रूप से ट्रांसजेंडर और गैर-द्विआधारी लोग, अपनी लैंगिक पहचान या अभिव्यक्ति के कारण अक्सर घृणा अपराधों का शिकार होते हैं। इन अपराधों में अक्सर शारीरिक हिंसा, यौन हमला और सार्वजनिक अपमान शामिल होता है। महिलाओं के विरुद्ध लिंग-आधारित घृणा हालाँकि, कई न्यायालयों में "नारी-द्वेष” को पारंपरिक घृणा अपराध श्रेणी में शामिल नहीं किया जाता, पर कई विद्वान और कार्यकर्ता तर्क देते हैं कि महिलाओं के खिलाफ की गई कुछ हिंसात्मक कार्रवाईयाँ लिंग के आधार पर घृणा से प्रेरित होती हैं। जैसे, कुछ सामूहिक गोलीबारी की घटनाएँ जहाँ हमलावर महिलाओं के प्रति घृणा का प्रदर्शन करते हैं इंटरसेक्शनैलिटी लिंग का प्रभाव अन्य पहचानों (जैसे जाति, धर्म, विकलांगता) के साथ मिलकर और भी तीव्र हो जाता है। उदाहरण के लिए, एक काली ट्रांसजेंडर महिला को श्वेत समलैंगिक पुरुष की तुलना में अधिक और विभिन्न प्रकार के घृणा अपराधों का सामना करना पड़ सकता है, जहाँ घृणा का प्रेरक उसकी जाति और लिंग दोनों होते हैं। 2. ???? अपराधी/हमलावर के रूप में लिंग का प्रभाव घृणा अपराधों में पुरुषों का वर्चस्व रहा है, जो सामाजिक शक्ति संरचनाओं को दर्शाता है। पुरुषों की प्रमुखता: घृणा अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधियों में पुरुषों की संख्या ऐतिहासिक रूप से अधिक रही है। यह आंशिक रूप से सामाजिक रूप से स्वीकृत "पुरुषत्व (Masculinity)" की रूढ़िवादी धारणाओं से जुड़ा हो सकता है जो आक्रामकता और प्रभुत्व को बढ़ावा देती है। पुरुष अक्सर घृणा समूह और अतिवादी आंदोलनों में प्रमुखता से शामिल होते हैं। महिलाओं की भूमिका: महिलाएँ घृणा अपराधों में अपराधी के रूप में कम रिपोर्ट की जाती हैं, लेकिन वे घृणा समूहों में समर्थन देने वाली, वैचारिक प्रेरणा देने वाली या भर्ती करने वाली के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। 3. कानून और नीति पर प्रभाव कानूनों में लिंग-आधारित घृणा के अपूर्ण समावेशन से प्रतिक्रियाएँ प्रभावित होती हैं। कानूनी परिभाषाएँ: कई देशों में घृणा अपराध कानूनों में लिंग को "संरक्षित विशेषता" के रूप में शामिल किया गया है, लेकिन कुछ में यह अनुपस्थित है या केवल लैंगिक पहचान तक ही सीमित है, जैविक लिंग या नारी-द्वेष को शामिल नहीं करता। यह कानूनी अंतर यह निर्धारित करता है कि क्या किसी विशेष अपराध की जाँच और मुकदमा घृणा अपराध के रूप में चलाया जाएगा या नहीं ! निष्कर्ष घृणा अपराधों में लिंग का प्रभाव बहुआयामी है। यह मुख्य रूप से ट्रांसजेंडर और गैर-द्विआधारी व्यक्तियों को लक्ष्य बनाने वाले अपराधों में एक प्रमुख प्रेरक कारक है, और नारी-द्वेष से प्रेरित हिंसा पर कानूनी बहस को जन्म देता है। सामाजिक संरचनाएँ, जो पुरुषों को अधिक शक्ति देती हैं, उन्हें प्रमुख अपराधियों के रूप में भी स्थापित करती हैं। लिंग की भूमिका को समझने के लिए इंटरसेक्शनैलिटी को ध्यान में रखना सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोई भी व्यक्ति केवल एक पहचान के आधार पर पीड़ित नहीं होता है।


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Ghanshyam (LL.B(Hons.))